चलिए इस 'मजाक' का पूरा नाम आपको बताता हूँ| इसका पूरा नाम है 'कसाब का मजाक' और ये मजाक उसने किया है हमारे देश के कानून के साथ| और कानून की कोई छोटा-मोटा नहीं बल्कि आतंकवाद निरोधक कानून |
अरे आप इसे मजाक समझ रहे हैं क्या?? आपको इसके परिणाम बता दूं तो आपको इसकी गंभीरता का एहसास होगा| अजी आतंकी तो देख देख के ताली बजा रहे होंगे इस तमाशे को|
वैसे हमारे लिए ये कोई नई बात तो नहीं है| संसद पर हुए हमले को हम शायद भूल चुके हैं और शायद यह भी की मुख्य साजिशकर्ता अजहर का फैसला आना अभी भी बाकी है|
अगर आप एक आम आदमी हैं तो कोर्ट कचहरी का नाम सुनते ही आपका हाजमा ख़राब हो सकता है, रक्त-चाप बढ़ सकता है और आप पंडितों के चक्कर लगाना शुरू कर देंगे| इतना भय खाता है एक आम आदमी 'कानून' के नाम से!! और आतंकवाद निरोधक कानून तो इतने कड़े होते हैं की अगर कोई निर्दोष आदमी गलती से इसमें फंस गया तो आजीवन संघर्ष ही करता रहेगा|
लेकिन कसाब भरी अदालत मे पूरी दुनिया के सामने झूट बोलता है, अपने बयान बदल देता है, पहले कही गयी बात से साफ़ मुकर जाता है| क्या मतलब लगायें इसका? इसके पीछे कौनसी साजिश छुपी है?
मुझे तो लगता है की आतंकवादी सोचते होंगे की बहुत हो गया जिहाद; मरने से क्या फायदा, हम तो जिंदा रहके ही भारत को ज्यादा नुकसान पंहुचा सकते हैं और ये हमें फांसी देंगे भी नहीं|
चलिए कोई नहीं अभी तो हमारे पास गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा, बेरोज़गारी जैसे दर्ज़नों समस्याएं हैं, ये कसाब कौनसे खेत की मूली है! देख लेंगे इसको भी
जाते जाते एक गाना याद आ रहा है "जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो कहाँ हैं"
